Sad breakup poems in hindi- दुःख भरी ब्रेकअप कबिताये

1दोष

हम दोनों को खोने में
दोनों का दोष नहीं है
दोष किसी को दूँ भी कैसे
मुझको खुद होश नहीं है ।

बातें जो तब कही थीं तूने
अब तक मुझको याद हैं
अपने ख्वाबों पर बसा शहर
अब तक मन में आबाद है
तेरी बातें मन में मेरे
अब भी खामोश नही हैं
पर दोष किसी को दूं भी कैसे
मुझको खुद होश नहीं है ।

मुझसे भेद छुपाया था ,
पर खुद से तो बोला होता
जो बोझ दिया तूने मुझको
कभी उसको भी तौला होता
मन अब भी तेरी बातें सुनता
पर मदहोश नही है
दोष किसी को दूँ भी कैसे
मुझको खुद होश नहीं है ।

जब मैं साथ तेरे था
तुझसे खूब लड़ा करता था
क्योंकि दूर तेरे जाने से
मन मेरा बेहद डरता था
पर जब तूने ही सोच लिया तो
अब लड़ने का जोश नही है
दोष किसी को दूं भी कैसे
मुझको खुद होश नहीं है ।

मन बेहोश था शायद मेरा
जो सब तुझसे कह देता था
तू चाहे कितने झूठ कहे
पर मन तब सब सह लेता था
बातें तो अब भी करता हूँ
पर मन बेहोश नही है
दोष किसी को दूं भी कैसे
मुझको खुद होश नहीं है ।

मजबूरी तेरी भी होगी
जो मुझको शायद पता नही है
पर सबकुछ मैं ही क्यों झेलूं
जब मेरी कोई खता नही है
पता तो तेरे मन को भी है
के तू निर्दोष नही है |
पर दोष किसी को दूं भी कैसे
मुझको खुद होश नहीं है ।

2उसने छोड़ा मुझे तो क्या हुआ

दिल तोडा मेरा तो क्या हुआ
देखकर ज़माने की बेरुखी साथ छोड़ा मेरा तो क्या हुआ
हसरते थी बहुत साथ जीने की उसके
हुई न कोई हसरत पूरी तो क्या हुआ

दिखाये थे उसने ख्वाब बहुत सारे
देखे थे मेने भी ख्वाब बहुत सारे
न हुआ कोई ख्वाब मुक़म्मल तो क्या हुआ
छोड़ा उसने मुझको कोई मज़बूरी रही होगी
दिल के कोने में कही वो भी तड़पती रही होंगी
कह न सकी जाने से पहले कुछ तो क्या हुआ

प्यार करती है मुझसे दिल में यही कहती रही होगी
प्यार था उसका सच्चा फिरभी छोड़के जाना पड़ा
शायद उसे प्यार से बड़ा कोई फर्ज निभाना पड़ा
सहकर सब कुछ कुछ न कह सकी तो क्या हुआ

प्यार था मुझको उससे , है मुझको उससे
बस संग न होंगे हम तो क्या हुआ
सांसे तो जुडी है हमारी एक दूजे के संग
बस कुछ रिश्ते न जुड़ सके तो क्या हुआ

दूर है बहुत पर सदा पास होंगे
जुदाई के आलम में भी साथ साथ होंगे
यु ही मिलते रहेंगे ख़्वाबो में हरदम
मिले न हकीकत में तो क्या हुआ

कवि – महेश “हठकर्मी”

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